
कार्यक्षेत्र
आपराधिक कानून
जमानत, एफआईआर रद्दीकरण, ट्रायल पैरवी और अपील — दिल्ली एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं देहरादून की अदालतों में।
इसमें क्या शामिल है
आपराधिक मामला केवल एक अदालती फाइल नहीं होता — यह आपकी नौकरी, परिवार और प्रतिष्ठा को प्रभावित करता है। एफआईआर के बाद के पहले 48 घंटे अक्सर पूरे मुकदमे की दिशा तय कर देते हैं।
अधिवक्ता सुमित त्यागी जमानत, अग्रिम जमानत, डिस्चार्ज, एफआईआर रद्द करने की याचिका और पूर्ण ट्रायल पैरवी में गाज़ियाबाद, नोएडा, दिल्ली, हापुड़, मेरठ एवं देहरादून की मजिस्ट्रेट व सेशन अदालतों में — तथा संबंधित मामलों में प्रयागराज उच्च न्यायालय के समक्ष पेश होते हैं।
किसी भी कदम से पहले आपको आपकी स्थिति, संभावित परिणाम और खर्च स्पष्ट रूप से बताया जाता है — कोई झूठा आश्वासन नहीं।
सामान्यतः देखे जाने वाले मामले
- अग्रिम एवं नियमित जमानत आवेदन
- धारा 482 CrPC / BNSS के तहत एफआईआर रद्दीकरण
- IPC / BNS अपराधों में ट्रायल पैरवी
- आपराधिक अपील एवं पुनरीक्षण
- शिकायत एवं प्रति-शिकायत
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नीचे विवरण भरें। व्हाट्सएप आपके मामले के सारांश के साथ खुल जाएगा — कोई खाता, भुगतान या प्रतीक्षा नहीं।
